शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

मेरी पसंद....

हम महिलाओं को जो कुछ देते हैं,
उसके बदले में वे हमें
उससे ज़्यादा ही लौटाती हैं-
यदि आप उन्हें प्यार दें
तो वे आपको संतान देती हैं.
यदि आप उन्हें मकान दें,
तो वे आपको घर देती हैं.
यदि आप उन्हें अनाज दें,
तो वे आपको भोजन देतीं हैं.
यदि आप उन्हें मुस्कुराहट दें,
तो वे आपको अपना दिल दे देती हैं.
हम उन्हें जो कुछ भी दें,
बदले में वे हमें
कुछ ज़्यादा ही लौटाती हैं,
इसलिये हम उन्हें कोई
छोटी-मोटी तक़लीफ़ दें,
तो हमें एक बहुत बड़ी मुसीबत के लिये
तैयार रहना चाहिए.

सौजन्य: कर्नल विनय नरूला


44 टिप्‍पणियां:

सतीश पंचम ने कहा…

Superb!

यशवन्त माथुर ने कहा…

एक एक शब्द से पूरी तरह सहमत.

mark rai ने कहा…

हम उन्हें जो कुछ भी दें,
बदले में वे हमें
कुछ ज़्यादा ही लौटाती हैं,
इसलिये हम उन्हें कोई
छोटी-मोटी तक़लीफ़ दें,
तो हमें एक बहुत बड़ी मुसीबत के लिये
तैयार रहना चाहिए.........
....MUJHE NAHI LAGTA KI HAREK KE SAATH AISA HOTA HAI...YE VYAKTI VISHESH PAR DEPEND KARTA HAI KI WAH KAISE KISI CHIJ KO LETA HAI...PAR POST BAHUT ACHCHI HAI...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शब्दशः सहमत।

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

हम उन्हें जो कुछ भी दें,
बदले में वे हमें
कुछ ज़्यादा ही लौटाती हैं,
इसलिये हम उन्हें कोई
छोटी-मोटी तक़लीफ़ दें,
तो हमें एक बहुत बड़ी मुसीबत के लिये
तैयार रहना चाहिए...
बहुत अच्छी रचना प्रस्तुत की है वंदना जी, रही बात बदले में मुसीबत की, बहुत सी नारियों का जीवन ’धरती की तरह हर दुख सह ले’ के सिद्धांत पर चलते हुए कट जाता है.

वाणी गीत ने कहा…

कल ही पढ़ा था अखबार में ....
हलके मूड में पतिदेव को पढ़कर सुनाया ,
गहराई से चिंतन किया !
जिंदगी के इको पर एक बेहद प्रभावी लघु कथा याद आयी ...

अनूप शुक्ल ने कहा…

मजेदार!

राज भाटिय़ा ने कहा…

सुंदर अति सुंदर. धन्यवाद

Kajal Kumar ने कहा…

वाह भई कर्नल साहब. waao.

rashmi ravija ने कहा…

कुछ दिन पहले गद्य रूप में यह इ -मेल सर्कुलेशन में था...लेकिन इसका एक की-वर्ड भी था...वो पूरी की पूरी पंक्ति ही गायब कर दी....उसे कवित्त रूप में नहीं ढाला...कवि ने

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना !
पढ़वाने के लिए आभार!

shikha varshney ने कहा…

ekdam saty vachan.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बेमिसाल.... साझा करने का आभार

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

नमस्ते वंदना जी,
प्रेम दिवस की शुभकामनायें, सही कहा आपने, हमेशा तैयार रहना चाहिए, उम्मीद से दुगना!

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

यदि आप उन्हें मुस्कुराहट दें,
तो वे आपको अपना दिल दे देती हैं.
हम उन्हें जो कुछ भी दें,
बदले में वे हमें
कुछ ज़्यादा ही लौटाती हैं,

ये तो बिल्कुल सच है कि कुछ मीठे बोल और मुस्कुराहटों के लिये नारी अपना प्यार और ममता लुटा देती है ,
सुंदर पंक्तियां हैं वंदना !

सतीश सक्सेना ने कहा…

वाह भाई वाह !!
बिलकुल सच है , विनय नरूला को परिचय कराने के लिए आभार !

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

चेतावनी जैसी लगी:)

बात तो एकदम सही लग रही है, generally.

ZEAL ने कहा…

.

वंदना जी , बहुत ही सुन्दर बात लिखी है । काश ये छोटा सा सच यदि कोई समझ ले तो बड़े बदलाव आ सकते हैं ।

.

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

Satay....likha hai aapne. Sahmat hun. Rachna ke bhaav sarthak hai.

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

कर्नल विनय नरूला ji ko Shubhkaamnaye.
Rachna behad umda aur saarthak hai.

ज्योति सिंह ने कहा…

mujhe to poori rachna hi bahut sundar lagi ,kyonki main nari hoon isliye dil ko bhi chhoo gayi .jitna padhu utna hi aur ....

sagebob ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना.
पढवाने के लिए शुक्रिया.
सलाम.

minoo bhagia ने कहा…

sach likha hai

daanish ने कहा…

ऐसा दिलचस्प आलेख
पढवाने के लिए
बहुत बहुत शुक्रिया ....

Vijai Mathur ने कहा…

.'पढी हुयी कहानी तथा यह कविता दोनों संदेशप्रद हैं.

Arvind Mishra ने कहा…

चलिए हम उन्हें और इस सुन्दर सी पोस्ट की लेखिका को प्यार देते हैं :) ...और इंतज़ार करते हैं :)

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

क्या बात है वंदना जी ....
कर्नल साहब को मेरा शुक्रिया कहियेगा .....
इस पैगाम के लिए ....
सावधान पतियो .....!!

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

कितनी सही बात ! लेकिन लोग हैं कि दुःख उठाने के बाद भी नहीं समझ पाते।

madansharma ने कहा…

वंदना जी , बहुत ही सुन्दर बात लिखी है ।मेरा शुक्रिया, बहुत बहुत शुक्रिया ....

madansharma ने कहा…

वंदना जी , बहुत ही सुन्दर बात लिखी है ।मेरा शुक्रिया, बहुत बहुत शुक्रिया ....

mahendra verma ने कहा…

बहुत ही सुंदर काव्यात्मक ढंग से आपने आधी दुनिया को चेतावनी दे दी।
बहुत बढ़िया।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

vandana ji , bahut hi acchi aur sundar baat kahi , ek sandesh chupa hua hai .. aapko badhayi

----------
मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
विजय

शोभना चौरे ने कहा…

ऐसे ही धरती माँ की उपाधि थोड़े न मिली हुई है ?
बिलकुल सही है |

वीना ने कहा…

वाह...क्या बात कही है...काश यह सब समझ पाते...दिल जीत लिया...फॉलो भी कर रही हूं...

Suman ने कहा…

vandana ji, bahut sunder rachna.......

रश्मि प्रभा... ने कहा…

हम उन्हें जो कुछ भी दें,
बदले में वे हमें
कुछ ज़्यादा ही लौटाती हैं,
इसलिये हम उन्हें कोई
छोटी-मोटी तक़लीफ़ दें,
तो हमें एक बहुत बड़ी मुसीबत के लिये
तैयार रहना चाहिए.
bilkul

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर सन्देश दिया है कर्नल साहिब ने। सभी महिलाओं को उनका धन्यवाद करना चाहिये। शुभकामनायें।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा...

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप को सपरिवार होली की हार्दिक शुभ कामनाएं.

सादर

Dinesh pareek ने कहा…

आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
http://vangaydinesh.blogspot.com/
http://dineshsgccpl.blogspot.com/

Dinesh pareek ने कहा…

आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
http://vangaydinesh.blogspot.com/
http://dineshsgccpl.blogspot.com/

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएँ

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 20/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

shukriya yashwant.