रविवार, 8 नवंबर 2009

मेरी पसंद

निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफ़ी है,
हवा का रुख बदलने के लिये चाहत ही काफ़ी है.

ज़रूरत ही नहीं अहसास को अल्फ़ाज़ की कोई,
समुन्दर की तरह अहसास में शिद्दत ही काफ़ी है.

बडे हथियार लेकर लेकर जंग में शामिल हुए लोगों
बुराई से निपटने के लिये कुदरत ही काफ़ी है.

किसी दिलदार की दीवार किस्मत में नहीं तो क्या
ये छप्पर, झोपडे , खपरैल की यह छत ही काफ़ी है.

माधव कौशिक

( "अंगारों पर नंगे पांव" से साभार)

28 टिप्‍पणियां:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

maadhav koushik ji ko badhaai !

vandana ji ko dhnyavaad !

waah !

bahut behtareen ghazal.........

dil khush ho gaya...

अर्कजेश ने कहा…

बहुत बढिया गज़ल पढवाई है !

हिम्मत प्राथमिक है ! बाकी सब उसके पीछे ।

महफूज़ अली ने कहा…

बेहतरीन शब्दों के साथ ........बहुत अच्छी लगी यह ग़ज़ल...... ...

================================

वंदनाजी... आज एक लघुकथा पोस्ट कि है......"काग़ज़ पर स्वीमिंग पूल ......."

देखिएगा ज़रूर....

आभार....

M VERMA ने कहा…

बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

माधव कौशिक जी की सुन्दर रचना पढ़वाने के लिए वन्दना जी को आभार!

Kishore Choudhary ने कहा…

उम्दा ग़ज़ल है, माधव जी अच्छा लिखते हैं. हमसे बांटने का आभार.

वाणी गीत ने कहा…

माधवजी की यह गजल साझा करने का
बहुत आभार ...!!

mark rai ने कहा…

bahut hi badhiya gazal.........
himmat hi to duniya hai aapko aur use mera salaam.......

ज्योति सिंह ने कहा…

ek se badhkar ek ,madhav ji ka jawab nahi .

Ismat Zaidi ने कहा…

Maadhav ji bahut bahut mubarak ho.
nek khayal umda alfaz ke saath.vandana dhanyavad.

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey ने कहा…

ओह, सही है - काफी है कुदरत! पर वह अपना समय खुद तय करती है निपटने का और धीरज का कभी कभी कड़ा इम्तहान लेती है!

रचना दीक्षित ने कहा…

सही कहा बुराई से निपटने के लिए कुदरत ही काफी है आज वही सब झेल रहे है सब लोग

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

माधव कौशिक की रचना की प्रस्तुति के लिया आभार.
सच्चाई के धरातल पर लिखी ग़ज़ल बेहद अच्छी है.
उन्हें बधाई.
- विजय

Babli ने कहा…

बहुत सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब ग़ज़ल लिखा है! दिल को छू गई आपकी ये बेहतरीन ग़ज़ल!

लवली कुमारी / Lovely kumari ने कहा…

अंदाज पसंद आया.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

सौ आने सच्ची बात कही आपने हर एक पंक्ति कुछ ना कुछ सीख देती है ..बेहतरीन ग़ज़ल..बहुत बहुत बधाई वंदना जी

*KHUSHI* ने कहा…

vandanaji aapka shukriya hamare blog pe comment dene ke liye....

aur aap ki ye Gazal kel iye hum kya kahein...

ji likha hain woh ishara kaafi hain
baaki hum nachees kya chees hain...
2 shabd ne jo kah daali baat owh kaafi hain..waise khamoshi se apna kaam karna gawara hain...

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

sada ने कहा…

निहत्‍थे आदमी के लिये हवा ही काफी है,
बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना, बधाई बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये ।

Devendra ने कहा…

किस्सा-कहानी में यह खूबसूरत गज़ल कहाँ से आ गई

MUFLIS ने कहा…

Maadhav Kaushik ji ki
umdaa gzl padhvaane ke liye
bahut shukriyaa .

निर्झर'नीर ने कहा…

आपकी पसंद का जवाब नहीं ..लाजवाब

आपको और माधव जी को बंधाई

बेनामी ने कहा…

Thank you concerning the wonderful information.

Sadhak Ummedsingh Baid "Saadhak " ने कहा…

रचना तो सुन्दर, लेकिन लङने-भिङने का भाव.
प्रकृति उत्सवमय सारी, क्यों बना यह तेरा चाव?
चाव बना क्यों लङने का, आओ मैं प्यार सिखा दूँ.
गले लगा लो दुश्मन को भी, ऐसा राज बता दूँ.
यह साधक देखता निरन्तर रचना सुन्दर.
छोङो संघर्श का भाव, लगेगी रचना सुन्दर.

बेनामी ने कहा…

Hiya many thanks regarding your page.I truly enjoy your web site.Its very informative.On the other hand I genuinely want you to post how you put social bookmarking below your post.We like it since it's a really clean great blogger hack.
thank you quite much

बेनामी ने कहा…

Your webpage is without a doubt full of excellent details and is actually extremely great to browse through.

Properly done!

बेनामी ने कहा…

The blog is definitely full of outstanding information and facts and is actually pretty fun to look into.

Well carried out.
___________________________
[url=http://insanityworkoutdvd.com/P90X-WORKOUT]P90x Workout[/url]