रविवार, 10 मई 2009

"ऐसी होती है माँ"

तेरे दामन में सितारे हैं, तो होंगे ऐ फलक,
मुझको अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी।

लबों पे उसके कभी बददुआ नहीं होती,
बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती।

ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,
मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है।

( माँ के लिए कही गई मुन्नवर राना की इन पंक्तियों से बेहतर मुझे कोई और रचना नही लगती)

21 टिप्‍पणियां:

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

अति उत्तम वंदना जी
_विजय

Udan Tashtari ने कहा…

मुन्नवर राना जी की माँ पर लिखी हर पंक्तियाँ गजब की हैं.


मातृ दिवस पर समस्त मातृ-शक्तियों को नमन एवं हार्दिक शुभकामनाऐं.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

विजय जी, समीर जी, मुनव्वर राना इस दौर के एक ऐसे शायर हैं, जिनकी तुलना दुष्यंत कुमार से करें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी.

Kishore choudhary ने कहा…

मदर्स डे पर खूबसूरत प्रस्तुति, बधाई

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

धन्यवाद किशोर जी.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

वाकई आपने सच लिखा है .

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

धन्यवाद मनोज जी.

ARUNA ने कहा…

सच में माँ से बढ़कर कोई नहीं!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

जी हां अरुणा जी, मां है, तो सब है.

MUFLIS ने कहा…

janaab manavvar rana ji ke khoobsurat kehan ko
hm sb tk pahunchane ke liye shukriya...
aapke pakeeza khyalaat se bhi ru-b-ru ho gye
abhivaadan .
---MUFLIS---

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

धन्यवाद मुफ़लिस जी.

Science Bloggers Association ने कहा…

Maan anmol hai.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

jee haan zakir ji,maa ki koi jagah koi nahi le sakta.

ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल ने कहा…

रचना मन को गहराई तक छूती है। माँ तो माँ होती है, उसका कोई बदल नहीं होता। मैं तो जो हूँ ,माँ की बदौलत ही हूँ।

ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल ने कहा…

बहुत ही प्यारी रचना, मन की गहराई तक उतर गई। माँ तो माँ होती है, उसका कोई बदल नहीं होता।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

dhanyvad shyamsundar ji.

Sanjeet Tripathi ने कहा…

sahmat hu.
maa par to munavvar rana ne ek se ek sher likhe hai, sabhi dil ko chhu jane wale aur true.

anantragni ने कहा…

maan shabd ko lavzon mein isse acha vyakt karna mushkil hai.

Nidhi ने कहा…

bhut saare bhavo ko aapne thode se shabdo me bhut sundrta se dhaala hai

BANTI ने कहा…

ye panktiya hme andar tak choo jati kai.

रणविजय ने कहा…

आखिर माँ तो माँ है ना