शुक्रवार, 24 अप्रैल 2009

अनुभव

"पढियेगा बार-बार हमें

यूं ना फेंकिये,

हम हैं इंसान,

शाम का अखबार नहीं हैं"

( बुज़ुर्गों के प्रति......)

4 टिप्‍पणियां:

Arkjesh ने कहा…

Bdhiya.....

mark rai ने कहा…

bujurgo ke dard ko bakhubi ubhaara hai...fate aur puraane paper se tulna kar unki waastwik position ko darshaya hai ...
very nice post...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

धन्यवाद अर्कजेश जी,मार्क जी.

Kishore choudhary ने कहा…

बहुत खूब कहा है वाह वाह !!