गुरुवार, 12 मार्च 2009

ऐसे बीती होली...........
बडा रंगीला त्यौहार है होली!!!! रंगीला?? हां..कभी था. अब तो साल दर साल रंग फीके पडते जा रहे हैं.अब तो कई साल हुए हुरियारों की टोली देखे हुए.. फागों का मौसम तो कब का बीत गया..पता नहीं कहां गये वो ईसुरी की रस भीगी फागें गाने वाले..खैर... अभी कुछ साल पहले तक अडोस-पडोस के लोग, जो उम्र में मुझ से छोटे हैं, होली पर प्रणाम करने और अबीर लगाने तो ज़रूर ही आ जाते थे,लेकिन इस बार तो उन सब का भी पता नहीं...और दिनों की अपेक्षा कुछ ज़्यादा ही सन्नाटा पसरा रहा शहर में.बीच बीच में बच्चों की कुछ टोलियां अरूर होली का अहसास दिलातीं रहीं...
त्यौहारों पर मार केवल मंहगाई की नहीं है,बल्कि तथाकथित आधुनिकता की भी है.पर्व विशेष की पारम्परिकता को यदि दरकिनार कर दिया जाये तो त्यौहार में फिर कुछ बचता ही नहीं.अब आधुनिकता के नम पर ऐसी परम्पराओं को भी खत्म किया जा रहा है,जिनसे समाज को कोई नुक्सान कभी था ही नहीं;बल्कि ये तो जीवन में रस घोलने का काम करती थीं.भारत के रीति-रिवाज़ों को समझने और समझाने में मददगार थीं.अफ़सोस की आज इन त्यौहारों की रीतियों को "रूढियां" कहने वालों की कमी नहीं है, जबकि वास्तविक रूढियां, जिन्हें जड से हटाया जाना चाहिए आज भी अपनी जगह पर मौज़ूद हैं.... कोई संकल्प है हमारे पास इन्हें मिटाने का????

18 टिप्‍पणियां:

अर्कजेश *Arkjesh* ने कहा…

आपके ब्लॉग कि सादगी और बात कहने कि सरलता अच्छी लगी |

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

है वक्त की कोई शरारत या गई फ़िर उम्र ढ़ल
आते नहीं पहले सरीखे अब मजे त्यौहार के

श्यामसखा‘श्याम’

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

पधारें-गज़ल के लिये http://gazalkbahane.blogspot.com/
http://katha-kavita.blogspot.com/ कथा-कविता के लिये
श्यामसखा‘श्याम’

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बहुत ही सुन्दर विचार........वास्तव में आज समाज की स्थिति इस प्रकार की हो चुकी हैं कि रूढियों को जड से समाप्त करने की अपेक्षा हम लोग अपनी जडों से ही दूर होते जा रहे हैं.

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

ब्लोगिंग जगत में स्वागत है ।
लगातार लिखते रहने के लिए शुभकामनाएं
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लिए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

आप सबने जिस खूबसूरती के साथ मेरे ब्लौग की सराहना की है, उसके लिये तहे-दिल से आभारी हूं.आप सबका साथ हमेशा इसी प्रकार चाहूंगी..

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

श्यामल सुमन ने कहा…

खुद ही चलके पर्व सारे आते अपने गाँव तक।
हो गए हम आधुनिक क्या वास्ता त्योहार से।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

नारदमुनि ने कहा…

samay ke sath nahi chaloge to pichhe rah jaoge. if u do not move with the time u will lag behind.narayan narayan

Jyotsna Pandey ने कहा…

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है ,आपके लेखन के लिए मेरी शुभकामनाएं ................

दिल दुखता है... ने कहा…

ब्लोगिंग जगत में स्वागत है ।
लगातार लिखते रहने के लिए शुभकामनाएं

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

धन्यवाद आप सब को.........

neeshoo ने कहा…

vandana ji aap ka swagat hai . aap hindi sahitya me yogdaan karen . ( hindisahityamanch@gmail.com) mail kariye aagar aap ko ruchi hai toh

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

नीशू जी मैं मैं ज़रूर हिन्दी साहित्य मंच में योगदान करना चाहूंगी.आदेश करें

ashabd ने कहा…

वंदना जी कथा-कहानियां सुनने की आदत दादी-नानी से लगती है और फ‍िर कई कथाकार हो जाते हैं तो कई अच्‍छे पाठक। आपकी अभिरुचि प्रशंसनीय है। शुभकामना।

sanjaygrover ने कहा…

आप तो ब्लाग पर ब्लाग बनाए जा रहीं हैं, इरादे क्या हैं ?
BAHARHAL BADHAYI TO LE HI LIJIYE.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अरे अब और नहीं, मैं मूलत: कहानी विधा की हूं, इसलिये..ये अंतिम, संजय जी..

कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

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रायटोक्रेट कुमारेन्द्र