रविवार, 18 जनवरी 2009


कोई मुम्बई जाये और हाज़ी अली की दर्गाह पर ना जाये ऐसा हो सकता है क्या? हम भी पूरे भक्ति भाव से दरगाह पर गये। समुन्दर के बीच स्थित यह दरगाह सिद्ध दरगाहों में से एक मानी जाती है। समुन्दर के पानी को काट कर बनाया गया यह पवित्र स्थल लोगों ने इतना अपवित्र कर रखा है, कि दरगाह के प्रवेश द्वार से ही हर व्यक्ति को नाक बंद करनी पडती है। कचरा देख कर अफ़सोस होता है। प्रतिदिन जिस स्थान पर हज़ारों दर्शनार्थी मन्नत मांगने दूर-दूर से आते हों,उस स्थान की सफ़ाई व्यवस्था पर ध्यान देना ज़रूरी नहीं है क्या? यह तस्वीर तो मुझे मजबूरन उतारनी पडी, कम से कम कुछ लोग तो शर्मिन्दा हो सकें ,अपने द्वारा फैलाई गई इस गन्दगी को देखकर....

1 टिप्पणी:

ड़ा.योगेन्द्र मणि कौशिक ने कहा…

दरगाह पर गंदगी की तस्वीर देख कर और साथ ही आपके जागरुकता देख कर अच्छा लगा। कास आम नागरिक के साथ सरकर की भी नींद खुले..? मेरे व्यंग्य लेख बन्द का पाबन्द पर आपके विचार पढ़्कर अच्छा लगा ध्न्यवाद।